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Friday, May 3, 2013

ओनी पोनी जिन्दगी ..

ये जिन्दगी ...
जो कभी कहानी तो कभी गजल रही है ..!
कभी मछली सी ...
हाथो में है , जीने के लिए मचल रही है !! 

कभी गीली साबुन सी ..
पकड़ना चाहो तो भी फिसल रही है !

कभी थक कर बैठ रही , कभी ख़ुशी से उछल रही है 
ये जिन्दगी जो हर पल बदल रही है ...
जितना जीया इसे, उतना हाथ से निकल रही है !

ओनी पोनी जिन्दगी , 
आधा इंच ख़ुशी और एक इंच गम के बीच चल रही है ..
गिर रही है संभल रही है !! 

Saturday, April 20, 2013

दो शक्लों वाला बलात्कार...







ये दो शक्लों वाला बलात्कार मुझे पचता नहीं है

तुम्हारी राजधानी में हुआ बलात्कार अत्याचार है 

और हमारे कस्बें में हुआ बलात्कार चंद रुपयों का व्यपार है ?

सिर्फ इसलिए की वहां मीडिया है, हाई प्रोफाइल लोग है |

लाखों मोमबत्तियां और करोडो "मेल" फेशन में आ जातें है ||

चार दिन सार देश आँसूं बहाता है 
और फिर पांचवे दिन ipl का नाच दिखाता है !

हमारे अख़बारों में स्त्रियाँ रोज दम तोड़ती है
रोज चीथड़े चीथड़े होता है बचपन
पर किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती ?
बड़ी "ढीट" व्यवस्था है, सिर्फ केमरे के सामने हिलती है !
अँधा पढ़ा लिखा समाज है , सिर्फ भीड़ का अनुसरण करता है :(

Monday, February 18, 2013

pyar..ek dhokha.

                                                                सोचा था  उनसे बिछड़ कर जी नहीं पाएँगे,,
 कैसे उनका प्यार दिल से भुलाएंगे,,
दफ़न कर के सीने में यादों का मंजर 
कैसे उन पर एक नया घरोंदा बनायेंगे।
पर  मालूम ना था कि ये प्यार नहीं साज़िश है उनकी,,
हमारी बर्बादी ही मंजिल है उनकी,,
रब्ब मान कर पूजते थे जिनको
 नफरत के भी नाकाबिल है मोहब्बत उनकी।।

Sunday, January 13, 2013

खबर...









जब उसका जन्म हुआ
सब उसके आस पास थे ....
घेरे थे सब उसको चारों और से
सब उसके अंदर तक झांक लेना चाहते थे
उसके जर्रे जर्रे को.. पहचान लेना चाहते थे
किसी ने देख कर आह किया , किसी ने वाह किया
किसी ने एक दो और जोड़ कर उसे अफवाह किया ||

वो सुर्ख़ियों में रही कुछ दिन ...

दुनियां के आसुओं से उसकी जिन्दगी नम हुई ...
फिर कुछ दिन बीते , भीड़ उसके आस पास कम हुई  ...
जख्म भरने कोई आगे नहीं आया, वो अपने में ही गुम हुई ..

सिर्फ पुराने पन्नों में ,उसकी जिन्दगी छुपी है ...
वो एक "खबर" थी जो अब दम तोड़ चुकी है :)

Saturday, January 5, 2013

सिर्फ इतना सा कर लो ..




सुनो जहमत करो, अपनी सोच को बदलने की जरा सी ...
आज उसका दर्द , जो तुम्हे, महसूस नहीं हो रहा , 
कल वो दर्द, तुम्हे भी हो सकता है 
दर्द को बांधों मत किसी दायरे में ...|

कुछ देर के लिए आईपॉड के इअर फ़ोन को कानों से हटा कर, 
सुन भी लिया करो ..
की कोई दर्द से करहा तो नहीं रहा सड़क किनारे ...?

तुम्हारी आँखें अनदेखा क्यूँ कर देती है ..?
सड़क किनारे सर्दी में ठिठुरते, नग्न आदमी को
धुप से बचने का काल चश्मा , इंसानियत पर क्यूँ लगा लेते हो ?

खून रिसता क्षत विक्षत शरीर जो दिखाई पड़े
भयभीत मत हो , मुहं पोछने का रुमाल रखा है न जेब में माँ ने?
बांध दो उसे ..खून का रंग तुम्हरा भी same 2 same है ।

मोबाइल रखते हो न हाथ में ,जिसे तुम छेड़ते रहते हो बात ही बात में?
KBC का नंबर भी SAVE होगा उसमे ?
उसमे 108/100 भी save कर के रखो ..
हादसे के वक्त अमिताभ से ज्यादा, एम्बुलेंस काम आती है ...

सिर्फ इतना सा कर लो ,
क्यूंकि मोमबत्तियों जलाने से देश रोशन होता यदि
तो आजादी के 65 वर्षों बाद भी हम अंधेरें में नहीं "जी" रहे होते |
आहुति देता है चाँद , तब जा कर रोशन सवेरा होता है
जलाना पड़ेगा खुद को भी और दिमाग की बत्ती को भी, मोमबत्ती की तरह :)

Monday, November 12, 2012

रस्म निभाने के लिए दिवाली है ...

"
अपने घर का कचरा , सड़क पे डालने के लिए 
दिवाली है ...
मिलावट की मिठाइयाँ , गरीबों को बांटने के लिए 
दिवाली है ..

बेजुबान जानवरों को सताने के लिए 
दिवाली है 
फटाके फोड़ के , प्रदुषण फ़ैलाने के लिए 
दिवाली है ..

गर सरकारी अफसर हो आप तो 
जम कर खाने , के लिए दिवाली है ...
गर हो दुकानदार, तो थोडा बहुत 
कमाने के लिए दिवाली है ...

अजनबियों से मेल मिलाप बढ़ाने के लिए
दिवाली है 
"दीया तले अँधेरा" यह जताने के लिए 
दिवाली है ...

दीप नहीं, दिल जल रहें है, ये बताने के लिए 
दिवाली है ..
चकाचौंध से लोगो को भरमाने के लिए 
दिवाली है ..

साल भर के गम छुपा के , दो दिन मुस्कराने के लिए 
दिवाली है ...
ना वनवास ख़त्म करने की चाह है , और ना ही राम बनने की ललक 
अब तो सिर्फ और सिर्फ रस्म निभाने के लिए 
दिवाली है ...||

Saturday, September 29, 2012

खाली हाथ ...



सूरज आता खाली हाथ ... चाँद खाली हाथ जाता है 
कुछ खुशियाँ खोजने में ...पूरा दिन निकल जाता है ||


इस कद्र पड़ी है महंगाई की मार सब पर 
अब आम दिनों सा... त्यौहार निकल जाता है ..||

झूठे वादें झूटी कसमें और बेफिजूल की रस्में 
इन्ही चक्करों में सबका संसार निकल जाता है ||

जेब में जब आ जाता है गाँधी उनके ..
मन से उनके गाँधी बनने का विचार निकल जाता है||

लाख चाहता है हर एक ..."अन्ना" के रास्ते पर चलना 
पर जिन्दगी की रेस में ..आगे... भ्रष्टाचार निकल जाता है ||

चारों और से मजबूर आँखें ....जब शौर करती है 
तब वो आँख पर पर्दा कर ....घर से बाहर निकल जाता है ||

चाहता तो  मैं भी हूँ उसके लिए ताजमहल बनवाना 
कांग्रेस के दौर में फटी जेब से... सारा प्यार निकल जाता है :)
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