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Friday, May 3, 2013

ओनी पोनी जिन्दगी ..

ये जिन्दगी ...
जो कभी कहानी तो कभी गजल रही है ..!
कभी मछली सी ...
हाथो में है , जीने के लिए मचल रही है !! 

कभी गीली साबुन सी ..
पकड़ना चाहो तो भी फिसल रही है !

कभी थक कर बैठ रही , कभी ख़ुशी से उछल रही है 
ये जिन्दगी जो हर पल बदल रही है ...
जितना जीया इसे, उतना हाथ से निकल रही है !

ओनी पोनी जिन्दगी , 
आधा इंच ख़ुशी और एक इंच गम के बीच चल रही है ..
गिर रही है संभल रही है !! 
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