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Thursday, March 17, 2011

रंगों भरी होली



आप सभी पाठकों को और हमारी कलम से जुड़े हर एक इंसान को दिल कि कलम परिवार कि और से शुभ होली|
ये होली आप के जीवन में खुशियों के रंग बिखेर दे ||

दिल कि कलम परिवार में एक और नया मेहमान हाजिर है अपनी कलम कि लिखी को आप के दिल तक पहुचाने के लिये ... आशा है आप का साथ और आशीर्वाद हमे कमेन्ट के रूप में मिलता रहेगा ,

शुभ होली ||

धन्यवाद

दिल कि कलम से...

सुन
री सखी आई है होली, मैं भी खेलूंगी तेरे संग होली ॥
उमंग
है तरंग है मन में ,बीती होली की यादें है मन में ॥
सुन
री सखी आई है होली...

वो
करते रहना सारे दिन ठिठोली, याद आती है वो बचपन की होली॥
वो गुन्झियाँ , वो रंगबिरंगे गुलाल , कहीं लाल पीले तो कहीं काले होते गोरे गाल ||

उड़ते रंग आसमन में , दिखते एक से चेहरे हर इंसान में ...

वो शरारती तेवर , वो प्यार भरी बोली .. चारो और भागती पानी लिये बच्चों कि टोली ..

सुन री सखी आई है होली....

होली के रंग आज भी बदले नहीं उतने, रिश्ते और संस्कार बदले है जितने ..
आज कहीं पे जल रही है रिश्तों की होली, तो कहीं पे चल रही है बन्दुक से गोली ॥
दिल
में उमंग तो है पर मन सहमा सहमा है, खुशियाँ मन में है और हमें कुछ कहना है..
इच्छा दिल की हो इस बार ऐसी होली, खुशियों के हो रंग , संग में हो चावल रोली ॥
डोर
हो ऐसी रिश्तों की जैसे दामन चोली,खेलूंगी री सखी तब मैं भी होली॥
सुन री सखी आई है होली...
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