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Sunday, June 28, 2009

pathar ka dil

Log ruth jate hai mujh se
Aur mujhe manana nahi aata
Main chahti hu kya
Mujhe jatana nahi aata
Aansuo ko peena purani aadat hai
Mujhe aansu bahana nahi aata
Log kehte hai mera dil hai patthar ka
Isiliye isse pighlana nahi aata
Ab kya kahu main
Kya aata hai kya nahi aata
Bas mujhe mausam ki tarah badal jana nahi aata

3 comments:

WELCOME IN LIFE BY VIJAY PATNI said...

good yaar best creation :)

shubham jain said...

very gud...u very well play with words..

प्रकाश गोविन्द said...

सुन्दर रचना है !
कृपया इसको हिंदी में कर लें :

लोग रूठ जाते हैं मुझ से
और मुझे मनाना नहीं आता
मैं चाहती हूँ क्या
मुझे जताना नहीं आता
आंसुओं को पीना पुरानी आदत है
मुझे आंसू बहाना नहीं आता
लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का
इसीलिये इसे पिघलाना नहीं आता
अब क्या कहूँ मैं
क्या आता है क्या नहीं आता
बस मुझे मौसम की तरह बदल जाना नहीं आता

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