
कन्या भ्रूण हत्या एक ऐसा अपराध है जो मानवीयता के साथ जुदा है,कैसे माँ बाप अपने ही अंश का खून करते हैं,भले ही सरकार ने इस पर रोक लगाने के प्रयास किये हैं.पर कोई फायदा हुआ नहीं है,पहले जो काम खुले आम होता था अब चोरी छिपे होने लगा है,,
कैसा दिल है ये माँ का जो अपने ही बच्चे का खून करने पर उतारू हो जाता है
एक ऐसी ही बच्ची की पुकार...
मुझे मत मारो मैं तुम्हारा अंश हूँ माँ,
जैसे तुम हो बेटी,मैं भी तो वैसे हूँ ना।
मुझे जीना है,एक बार इस दुनिया में आना है माँ,
अपनी गोद में फिर तुम मुझे सुलाओगी ना।
इस परिवार का हिस्सा मुझे बनना है माँ,
पापा की लाडली भी तो मैं बनूँगी ना।
तुम जो कहोगी वो काम मैं करुँगी माँ,
इससे तुम्हे भी तो थोड़ी राहत मिलेगी ना।
कुछ बनना है मुझे कुछ कर दिखाना है माँ,
फिर शान से तुम कहना मेरी बेटी है ना।
तुम क्यों चिंता करती हो मेरी पढाई की शादी की माँ,
हर बच्चा इस दुनिया में अपनी किस्मत लाता है ना।
मुझे बस तुम्हारी ममता की छाँव चाहिए है माँ,
मुझे मत मारो मैं तुम्हारा अंश हूँ माँ...
अगर इस प्रयास से एक भी माँ का दिल पिघल गया तो ये प्रयास सार्थक होगा..
11 comments:
ise padh ke ek maka dil bhi pighla to humara bloging karna sarthak h
gud job ekta :)
maarmik kavitaa.....sach....
बहुत ही मार्मिक कविता...
आप की प्रतिक्रियाओं व स्नेह के लिए आभार. यूँ ही प्रोत्साहन देते रहें..
well penned..
reality of society !! it must change
मर्मस्पर्शी एवं संवेदनशील ।
आईये जानें ..... मैं कौन हूं !
आचार्य जी
बहुत ही मार्मिक रचना .......बेहतरीन प्रस्तुती
"बेहद मर्मस्पर्शी कविता है उससे भी ज़्यादा प्रभावशाली विचार हैं.... उम्मीद है किसी न किसी पत्थर दिल का दिल अवश्य पिघलेगा...."
Very heart-touching and true words.....Nice effort
But pata nahi us maa ka dil pighalega ya nahi jo aisa kar pati hai..... :(
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