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Thursday, January 20, 2011

अपील

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इस
26 जनवरी कि पूर्व संध्या पे जब प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्भोधित करे , और राष्ट्रपति झंडा फहराए , उससे पहले मेरी देशवासियों से अपील है कि अपने मोबाइल कि कालर टोन , रिंग टोन , फेसबुक, ट्विटर का स्टेटस पे लगा दो ये गाना " सखी सैयां तो खूब कमात है महंगाई डायन खाए जात है "
पूरे भारत में हर एक मोबाइल पे, हर एक तबके के ,हर एक उम्र के लोग तक ये सन्देश भिजवा दो , ताकि लाल किले के कानों में हमारी आवाज़ पहुचें ,उन्हें पता चले कि पूरा देश हाहाकार कर रहा है महंगाई कि वजह से ||
आये दिन बढ़ रहे है भाव पेट्रोल डीजल गेस के , लगभग दोगुने हो गये है दूध , शक्कर , चाय , आटा , दाल के भाव | आलू , प्याज और सभी सब्जियों के भाव आसमान छु रहें है ||
और हमारें नेताओ को फुर्सत नहीं है घोटाले करने से , या खाली बयान बाज़ी करने से , या अपने कुरते में आई सलवटों को ठीक करने से ||
संसद में बैठे हर एक नेता को इस महंगाई से कोई असर नहीं पड़ रहा , असर हो रहा है आम आदमी पे , हम पे ||
देश कि सभी राजनितिक पार्टियाँ सिर्फ हो हल्ला कर रही है इस महंगाई पे लेकिन कोई इसको कम करने के लिए जागरूक प्रयास नहीं कर रहा है , नेताओ को लगता है कि हमारें देश में गरीब अब गरीब नहीं रहा , गरीब के पास पैसा बढ़ रहा है , लेकिन हकीकत में इस महंगाई ने हर एक तबके कि नींद उड़ा दि है ||
अब समय आ गया है कि हम अपने हक़ के लिए खुद लड़ें , और उसके लिए किसी बस को जलाने कि जरुरत नहीं है न ही देश को बंद कराने कि जरुरत है , बस जरुरत है अपनी बात आम से ले कर खास तक पहुचानें कि , और हमे यही करना है ||
इतिहास गवाह है युवाओ ने देश में हमेशा क्रांति कि अलख जगाई है , जब युवा जागा तो फिरंगियों को भी देश छोड़ के जाना पड़ा , तो ये महंगाई तो हमारे चंद लोगो द्वारा बनायीं गयी है इसे हम क्यों नहीं भगा सकते , मिटा सकते ?
जागो देश जागो , जागो देशवासियों ||

एक महंगाई पीड़ित
विजय पाटनी, नसीराबाद , राजस्थान ||

Wednesday, January 5, 2011

दो दीवारों सी जिन्दगी..



दो दीवारों सी हो गयी है जिन्दगी हमारी;
तुम्हे दिखते है आँसू मेरे ,और ही मुझे सुनाई देती है धडकन तुम्हारी ||
दो दीवारों सी हो गयी है जिन्दगी हमारी ||
में बाहरी हिस्से की वो दीवार जिसे सहना है वक्त के हर थपेड़े को ,
और बचाना भी है अपने आप को कालिख से;
मुझे सहना है हर एक की घूरती नजरो को भी ,
और इस दीवार के पीछे जो मेरे अपने है ,
मुझे बचाना है उनके वर्तमान को , और सवांरना है उनके भविष्य को भी ||

मेरा इम्तिहान यही खत्म नहीं होता... ,
अभी तो मुझे तुम्हारी प्रतिस्पर्धी निगाहों में भी अपनी जगह बनानी है |

क्युकी तुम हो अन्दर की वो सुन्दर दीवार, जिसकी आँखों में खटकती है मेरी बदसूरती ||
तुम्हे तो मेरे वजूद का अहसास तक नहीं है , क्युकी तुम अपने ही मद में मस्त हो ,
तुमने कभी मेरी नीवं की तरफ नज़र नहीं की, और ही सराहा कभी मेरी मजबूती को ,

जाने तुम कब समझोगे ...

तुम्हारे इस स्वरूप को बनाये रखने के लिए मैंने अपने कितने अरमानो को धुल में मिलाया है
और शायद इसी आस लिए हम फ़ना हो जायेंगे ,कि कभी तो बदलेगी नज़रें तुम्हारी ||

दो दीवारों सी हो गयी है जिन्दगी हमारी;
तुम्हे दिखते है आँसू मेरे ,और ही मुझे सुनाई देती है आवाज तुम्हारी ||


Saturday, January 1, 2011

हसरतों को नए पंख लगा लीजिये...


एक दशक और समाप्त हो गया और एक और साल यूँही पलक झपकते बीत गया ||
चलो जाने वाले साल को अपनें सारे गम दे दें , उसे अपने सारे जख्म दे दें ...
नया साल बस आप के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहता है,
चलो उसे ....ख़ुशी से आँखे नम दे दें ||
आप का साथ , और आप लोगो का आशीर्वाद हमारे इस ब्लॉग को पिछले साल खूब मिला है , उस के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद आशा है इस वर्ष भी आप का साथ हमे इस तरह मिलता रहेगा

नव वर्ष आप के लिए सुखमय मंगलकारी हो और इस नए दशक में आप के सभी सपने पूरे हो ||
हैप्पी न्यू इयर २०११


हसरतों को नए पंख लगा लिजियें ,कुछ नए सपने आँखों में समा लिजियें
ग़मों रंज कि स्याही को खत्म कर के यहीं,
नव वर्ष के पन्नों को अपनी मुस्कराहट से सजा लिजियें ||
हसरतों को नए पंख लगा लीजिये ||
आप सुखी रहे संपन्न रहें , कामयाबी आप के कदम चूमे ,
नए वर्ष में आप हर दिन खुशियों में झूमे,
जो दुआ देते है मन से ,अपनी तरक्की में उन्हें भी शामिल कीजिये ||
हसरतों को नए पंख लगा लीजिये ||
सुना है समय बड़ी तेजी से बदल जाता है ..?
पलक झपकते ही बदल जाते है सपनें,और अपनें भी
अपनों को व्यवहार से और सपनों को प्यार से करना है साकार
बस समय के साथ कदम से कदम मिला लीजिये
हसरतों को नए पंख लगा लीजिये ||
सूरज सा चमकें आप , और चाँद सा दमकें आप ,ख्याति फेलें तारों सी चारों और आप कि ,
दुनिया होगी आप के क़दमों में सोच को अपनी बदल लीजिये
हसरतों को नए पंख लगा लीजिये ||
नव वर्ष के पन्नों को अपनी मुस्कराहट से सजा लिजियें ||
happy new year 2011
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