
तुम हमें क्या रुलाओगे , ?
आंसू हमारी और आते आते , खुद ही मुस्कराने लगतें है |
हम चाँद को छेड़ देतें है , सूरज के सायें में
तुमको अब भी , हम सयाने लगतें है ?
दर्द की बात मत करना, ना ही जख्म देना हसीं कोई
जब गम होतें है ज्यादा दिल में , हम लोगो को हँसाने लगते है |
मुझे याद करना हर पल , मैं हिचकियो से घबराता नहीं
पर मुझे याद ना आना , हमें भूलने में ज़माने लगतें है |
मेरी तस्वीर देख कर , अपना इरादा बदल ना लेना
हम सूरत से , कुछ पागल दीवाने लगतें है |
तुम फूल हो, तो हमे fool बनाने की, गुस्ताखी ना करना
हम मूडी है , जब मन किया, खुद को ही सताने लगते है |
तुम बाग़ में रहों या घने जंगल में , परवाह किसे है ?
जब मन भर जाएँ फूलों से , हम काटों से रिश्तें बनाने लगते है |
तुम हमें क्या रुलाओगे , ?
आंसू हमारी और आते आते , खुद ही मुस्कराने लगतें है
7 comments:
सुन्दर गज़ल्।
तुम हमें क्या रुलाओगे , ?
आंसू हमारी और आते आते , खुद ही मुस्कराने लगतें है
waah bahut khub
gazal ka har sher behad umdaa....aabhar
दर्द की बात मत करना, ना ही जख्म देना हसीं कोई
जब गम होतें है ज्यादा दिल में , हम लोगो को हँसाने लगते है |
अच्छा शेर मुबारक हो ..............
तुम हमें क्या रुलाओगे , ?
आंसू हमारी और आते आते , खुद ही मुस्कराने लगतें है |
हम चाँद को छेड़ देतें है , सूरज के सायें में
तुमको अब भी , हम सयाने लगतें है ?
दर्द की बात मत करना, ना ही जख्म देना हसीं कोई
जब गम होतें है ज्यादा दिल में , हम लोगो को हँसाने लगते है |
मुझे याद करना हर पल , मैं हिचकियो से घबराता नहीं
पर मुझे याद ना आना , हमें भूलने में ज़माने लगतें है |
मेरी तस्वीर देख कर , अपना इरादा बदल ना लेना
हम सूरत से , कुछ पागल दीवाने लगतें है |
तुम फूल हो, तो हमे fool बनाने की, गुस्ताखी ना करना
हम मूडी है , जब मन किया, खुद को ही सताने लगते है |
तुम बाग़ में रहों या घने जंगल में , परवाह किसे है ?
जब मन भर जाएँ फूलों से , हम काटों से रिश्तें बनाने लगते है |ek ek line gazal ki itni khubsurati se ukeri hai ki kya jabab du....lazabab gajal hai aapki......pehli bar aapke blog pe aai hu....bahut maza aaya padh ke...namaste
बेहतरीन भावपूर्ण रचना.....
सुन्दर रचना...
सादर...
beghatareen gazal...maja aa gaya padhkar
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