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Wednesday, December 30, 2009

नया साल

क्या खोया क्या पाया इसका हिसाब क्यों है ?

मन वो ही, हम वो ही, वो ही रूह है ॥

फिर भी साल बदलने के साथ ही

सूरत ऐ हाल बदलने का दिल करता है

नयी उम्मीदों और नए सपनो को पंख लग जाते है

बुरे अहसासों को भूल जाने का दिल करता है ॥

कुछ ज्यदा बदलने वाला नहीं है

घडी के काटों और कलेंडर के पन्ने बदलने से

फिर भी आँखों में नए ख्वाब से क्यों है ?

क्या खोया क्या पाया इस का हिसाब क्यों है?!!

चलो ढलते हुए सूरज के साथ हम भी अपने
बुरे वक़्त को छोड़ चले पीछे ॥
और आने वाले साल मै कुछ नयी खुशियों का स्वागत करे
आज हमारा भी मन पुराणी बोटेल में नयी शराब सा क्यों है ?

क्या खोया क्या पाया इसका हिसाब क्यों है ?

हैप्पी न्यू इयर २०१०

Thursday, October 29, 2009

कोई हम से पूछे

किसी अजनबी को दिल में बसाना क्या है
कोई हम से पूछे
उसकी यादों में ख़ुद को भुलाना क्या है
कोई हम से पूछे
दिल फ़िर टूट के बिखर गया तो क्या
उन टुकडो को चुन कर नए अरमान बनाना क्या है
कोई हम से पूछे

किसी के दूर होकर भी पास होना क्या है
कोई हम से पूछे
न उम्मीद होकर भी इंतज़ार करना क्या है
कोई हम से पूछे
दिल की बाज़ी हार गए तो क्या
अपना सब कुछ खोकर भी मुस्कुराना क्या है
कोई हम से पूछे

होठो को सिल कर सब कुछ सहना क्या है
कोई हम से पूछे
अपने अश्कों को पी कर दुसरो को हँसाना क्या है
कोई हम से पूछे
खुदा से गिला करे भी तो क्या
उसकी हर रजा में सर को झुकाना क्या है
कोई हम से पूछे

Sunday, October 11, 2009

मन, ये मन हमेशा ही पैरो में पंख लगाये इधर से उधर उड़ता रहता है / न जाने कहाँ जाना चाहता है, क्या करना चाहता है / कठपुतली बना हमे हमेशा नाचता रहता है ये मन / कभी किसी को पल में अपना बना ले तो किसी से मुह मोड़ते भी देर न लगे / कभी चाँद तारे छूने का मन होता तो कभी आसमा में उड़ने का, फिर अचानक वास्तविकता से सामना होता और ये धडाम ज़मीं पर आ गिरता /

कभी मतवाला उन्मुक्त अल्हड जवानी के मद में डूबा हुआ, कभी अचानक से जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा हुआ / रोज़ एक नया अहसास एक नया विश्वास , विश्वास की मै भी कुछ कर पाऊ या फिर सोचते सोचते ही सारा वक्त मुट्ठी में बंद रेत की तरह फिसल जायेगा और जिंदगी उस मोड़ पर ला खडा कर देगी जहाँ इस मन का अपना कोई वजूद ही नहीं रह जायेगा /

जिंदगी की इस उतर चढाव में वक्त की तेज़ आंधी के थपेडे झेलते हुए न जाने कितनी बार इस मन को मरना पड़ता है / कई बार दुसरो का मन रखने के लिए तो कई बार अनजाने में / और कभी जब मन की मुराद पूरी हो जाये तो उस समय ये मन एक सुन्दर मोर बन बारिश के स्वागत में नाच उठता है , जिससे चारो ओर खुशियों की हरियाली छा जाती है /

कई बार धुंधली सी मंजिल की ओर भागता है / कई बार लक्ष्हीन हो अनजाने से रस्ते पर भटकता रहता है / मन की इसी द्वन्दिता को झेलते हुए कवी के मुख से अनायास ही निकल पड़ता है,

'मन रे तू कहे न धीर धरे'

Tuesday, October 6, 2009

ज़िन्दगी के खेल

ज़िन्दगी के खेल भी अजीब हैं
एक अजनबी को दिल के करीब ला दिया
कल तक जिसका नाम भी जेहन में न था
आज खुदा ने उससे हमारी तकदीर बना दिया
कुछ पल के साथ में ही
वो अपना सा लगने लगा
खुद से थे अनजान अब तक
वो हमे हमी से ज्यादा समझने लगा
कल तक तो ख्वाब में था चेहरा
वो हकीक़त बन सामने आ गया
हो गए हम ख़ास आज किसी के लिए
हमे मिटटी से सोना बना दिया
बस एक गुजारिश है खुदा से अब
के साथ उनका नसीब हो ज़िन्दगी भर
मेरे प्यार पर हो बस उनका ही हक
ये आंखे भी बंद हो तो उनका चेहरा देखकर....

Wednesday, August 26, 2009

इंतज़ार.....

आज दिल उदास है,आज मन बेचैन है
तुम्हारे दीदार को तरसे ये नैन हैं
इक पल की जुदाई भी अब सही न जाए
आँखे बंद की तो ख्वाब बन कर तुम आए
खुली आँखों में भी चेहरा बस तुम्हारा है
इस कदर तुमसे दूर रहना हमे न अब गंवारा है
कसम है तुम्हे प्यार की इक बार दरस दिखा दो
मझदार में जो कश्ती है उससे साहिल पर लगा दो
इंतज़ार में तुम्हारे गुजरें दिन रैन है
आज दिल उदास है,आज मन बेचैन है.....

Wednesday, August 12, 2009

तुम्हारी ही इबादत

दिल के आशियाने को,तुम्हारी यादो से सजाया करते हैं
तुमसे दूर रहने के गम को,कुछ इस तरह भुलाया करते हैं
कितने हसीं थे वो पल जब हम साथ थे
अब उन लम्हों को याद कर,कभी-कभी मुस्कुराया करते हैं
क्या हुआ गर खुदा को,हमारा साथ रहना मंजूर नही
अभी बी जीते हैं एक दूजे के लिए,ये बी तो कुछ कम नही
लाख कोशिश की उसने राहे जुदा करने की
पर दिल से मिटा पाये प्यार,ऐसा कभी मुमकिन नही
जहाँ भी रहेंगे सनम,बस तुम्हे ही याद करेंगे
तुमको मान कर खुदा,बस तुम्हारी ही इबादत करेंगे
मेरे प्यार पर है बस तुम्हारा ही हक
जब तक ये साँसे चलेंगी,बस तुम्हारे ही होकर रहेंगे

Thursday, August 6, 2009

आज


क्यों जिन्दगी आज इतनी उदास सी है
खुशियों की बढ़ रही प्यास सी है ॥
इतने चले फिर भी मंजिल का कहीं नामो निशाँ नही ...
अब और कितना चले ? थकान का अहसास भी है ।

अक्सर लोग पूछते है तुमने किया क्या है ?
हमे आज भी ये पता न चला हमे करना क्या है ?
इन अनसुलझे सवालों से हम निराश भी है ॥

हार कर बैठना मेरी फितरत में न था कभी ...
और अब फिर से नई जीत की तलाश भी है ॥
ये मेरा आज है मैंने बनाया है इसे
अपने कल को सवांरना भी मेरे हाथ ही है ॥
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