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Thursday, August 6, 2009

आज


क्यों जिन्दगी आज इतनी उदास सी है
खुशियों की बढ़ रही प्यास सी है ॥
इतने चले फिर भी मंजिल का कहीं नामो निशाँ नही ...
अब और कितना चले ? थकान का अहसास भी है ।

अक्सर लोग पूछते है तुमने किया क्या है ?
हमे आज भी ये पता न चला हमे करना क्या है ?
इन अनसुलझे सवालों से हम निराश भी है ॥

हार कर बैठना मेरी फितरत में न था कभी ...
और अब फिर से नई जीत की तलाश भी है ॥
ये मेरा आज है मैंने बनाया है इसे
अपने कल को सवांरना भी मेरे हाथ ही है ॥
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