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Monday, April 2, 2012

बचपन बचाओ :)



बचपन कैद रहिसों के मकानों में
रसोई में झूठे बर्तनों से ,खिलोने खेल रहें है
वो  गरीबी का भारी बोझ...
अपने कोमल कन्धों पर झेल रहें है |

लोग  देश के भविष्य को , कूड़ें में फेक रहें है |
सब मूक बन कर , नेहरु के गुलाब को
टुकड़ा टुकड़ा, बिखरते देख रहे है |
समाज चुप है , चुप सरकारें भी है
सब बचपन की लाश पर, अपनी रोटियां सेक रहें है |

बचपन यदि सही पल्लवित नहीं हुआ
तो एक सभ्य समाज , कैसे बना पाओगे ?
बचपन यदि बिगड़ा , अपना घर कैसे बचाओगे ?
समय है बचपन को सँभालने का ,
इस गुलाब को... महकती बगिया में ढालने का ||

2 comments:

वन्दना said...

बचपन यदि सही पल्लवित नहीं हुआ
तो एक सभ्य समाज , कैसे बना पाओगे ?
बचपन यदि बिगड़ा , अपना घर कैसे बचाओगे ?

सार्थक प्रश्न्।

सोनरूपा विशाल said...

अच्छी और सच्ची सोच ........समाज के लिए उम्दा उदाहरण !

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