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Wednesday, September 7, 2011

आज मेरा गम, तेरे गम सा क्यूँ है


आज मेरा गम, तेरे गम सा क्यूँ है ?
हम सब सुरक्षित है, यह वहम सा क्यूँ है ?
जख्म बन चुका है नासूर
पर वो ही पुराना मरहम सा क्यूँ है ?

बेकसूरों को मुआवजा , जान कि कीमत ?
और खुनी को बिरयानी , दामाद सी आवभगत
इस देश में ऐसा, नियम सा क्यूँ है ?
आज मेरा गम, तेरे गम सा क्यूँ है ?

गांधी भी चुप हैं , और भगतसिंह भी मौन है
सब जानते है पता कातिल का ....
पर सब "बन" के पूछ रहें है, कि अपराधी कौन है ?
आँख बंद करने से मौत टल जायेगी, तुझे ऐसा भ्रम सा क्यूँ है ?
आज मेरा गम, तेरे गम सा क्यूँ है ?

इन सफेदपोशों को, आईना भी, चेहरा कैसे दिखा देता है ?
बेशर्मी इतनी लहू में इनकें , लाशों पे राजनीति करना सीखा देता है ||
मारें तुने बेगुनाह हजारों , कभी कोर्ट में कभी फोर्ट में , कभी रोड पे कभी मोड़ पे
पर यह तो बता , इन सफेदपोश गद्दारों पे तेरा रहम सा क्यूँ है ?
आज मेरा गम, तेरे गम सा क्यूँ है ?
हम सब सुरक्षित है, यह वहम सा क्यूँ है ?

6 comments:

Aparajita said...

I don't have words to say anything........ :'( :'(

Sunil Kumar said...

यही तो दुर्भाग्य है हमारा यह हमारी रक्षा कैसे करेंगे

sumukh bansal said...

true..

वन्दना said...

कुछ कहने की स्थिति मे नहीं।

नीरज गोस्वामी said...

बेजोड़ रचना...

नीरज

रीता गुप्ता said...

Wah !!! bahut khoob.

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