
ये उस बेजुबान जानवर की अपील है जो शायद यदि बोल सकता तो आज इन्सान को इंसानियत का पाठ पढाता उन्हें जियो और जीने दो सिखाता ...
मैं मस्जिद गया मुझे अल्लाह मिला , मंदिर गया भगवान मिला
इंसान की तलाश में जब भी निकला मुझे हर शख्स हैवान मिला !!
मुझे मार कर के ये, अपने इंसान होने का दम भरते है ?
इतना प्यारा है इन्हें तू , फिर अपने जिगर के टुकड़े को क्यों नहीं तेरे नाम करते हैं ?
मेरे खून से लिख रहा है आज हर शख्स खुशियों की इबारत ....
तेरे ही नाम पे हो कुर्बानी हमारी, तो कोंन करेगा हमारी इफाजत ?
आलम है अब ये, जब भी लिया तेरा नाम किसी ने, मेरा पूरा कुनबा परेशां मिला ...
जिस दर से जी जाते है मुर्दे , उसी पाक दर में मुझे मेरा क़ब्रिस्तान मिला
इंसान की तलाश में जब भी निकला मुझे हर शख्स हैवान मिला !!
ऐ खुदा ये अपील है मेरी, मुझे किसी भी जीवन में इंसान मत बनाना
में तेरा नाम ले कर के किसी का खून बहा नहीं सकता
ऐसे कुर्बान हो के में खुश कर रहा हूँ इन्हें..
इंसान बन के में किसी के काम आ नहीं सकता !!
लगता है यूँ , ये जीवन मुझे इनाम मिला ...
इंसान की तलाश में जब भी निकला मुझे हर शख्स हैवान मिला !!
5 comments:
सार्थक,समयानुकूल, करूण रुदन,
ह्रदय द्रवित हो उठा, पत्थर है जो पुकार नहिं सुनते।
साधुवाद!!
Very true Boss. Chha gaye....
vaakai jaanvar yahi sochte honge.
बहुत सुन्दर!
Very right ...no one should be killed on the same of GOD
आप की ही कविता का शीर्षक लिखूंगी
ये हैवानों की बस्ती है ...यहाँ इंसान नहीं मिला करते
जहाँ कद्र ना हो दिल के ज़ज्बातो की ,
वहाँ जानवरों की कौन सुनेगा |
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