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Tuesday, July 27, 2010

क्या है माँ:

एक खूबसूरत अहसास है- माँ
हर मुश्किल में हमारा विश्वास है- माँ

हमारे लिए सारी दुनिया है- माँ

क्यूँकि, बच्चों के लिए खुशियाँ है- माँ

जिसकी गोद हर गम से निजात दिलाती है, वो है- माँ

मेरी हर तकलीफ में याद आती है मुझे- माँ

मेरे सिर पर हाथ रखकर, राहत देती है- माँ

इस मतलबी दुनिया में जिसे कोई मतलब नही , वो है – माँ

धरती पर खुदा का दर्शन है – माँ

दोगली दुनिया में सच्चा दर्पण है – माँ

मंज़िलों के लिए मैं नही जीता, मेरा रास्ता है- माँ

खुदा का भेजा हुआ, एक फरिश्ता है- माँ

सच तो ये है की तुम क्या हो माँ,

मैं लिख नही सकती , बता नही सकती ………………….. माँ

9 comments:

Rahul said...

Nice....whtever we write abt Maa..is less!!!

संजय भास्कर said...

कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

संजय भास्कर said...

माँ ,
एक शब्द ,
आँचल में जिसकी ,
सुकून है सारे जहाँ का

संजय भास्कर said...

माँ ,
एक शब्द ,
छिपा है जिसमे ,
एक अनोखा संसार !

Shekhar Suman said...

maa...
shayad is shabd ke baad kuch aur kehne ki aawayshyakta nahi hai...
bahut hi umdaah rachna...

देवेश प्रताप said...

माँ ...जैसे कोई नही इस दुनिया में .

satyam jain said...

thanks to all

sunita upadhyay said...

bahut sundar

Anurag said...

Waah!!!!!!!!!
Jiyo !!!!!!!
Great Saying......

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