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Sunday, July 4, 2010

भारत बंद


तेल महंगा शक्कर महंगी दाल रोटी सब कुछ हो गया महंगा
लगाम लगे न सरकार से दिखा रही वो ठेंगा ॥
और विपक्ष ने अपनी ही राग लगायी है
बंद करो बंद करो भारत .....छाई महंगाई है
सुबह से हर न्यूज़ चेनल पर दिखा रहे है आज भारतबंद है
मुझे समझ नहीं आता यार भारत कोई कोलगेट है की उसका ढक्कन बंद कर दिया और वो बंद हो गया ?
और बंद में कोन सा दरवाजा बंद हो गया ?
क्या गरीब के घर आज भूखमरी नहीं आएगी ? क्या रोज कमा के खाने वालों को आज पेट की चिंता नहीं सताएगी ?
क्या एक माँ अपने भूख से बिलखते बच्चे का मुंह कर सकती है आज बंद ?
और बंद करने वाले जिस मकसद से बंद करा रहे है आज वो उसी महंगे तेल को ज्यदा जला रहे है॥
एक दिन में अरबो का नुकसान... लोगो को नहीं मिल रहा जरुरत का सामान
दोनों ही राजनितिक पार्टियाँ अपनी अपनी रोटियां सेंकने में लगी है
भारत की भोली जनता नेताओं के हाथों हमेशा ही ठगी है ॥
कुछ बंद करना ही है तो भ्रष्टचार बंद करो गरीब पे हो रहे अत्याचार बंद करो ॥
व्यर्थ बह रहा पानी बिजली इस को बंद करो ..........
गुजारिश है कुछ आप बदलो कुछ सरकार बदलें
समय काटना मुशिकल हो जाता है.....
सो ऐसे बंद कर के हमे तंग न करो ॥

4 comments:

Akshita (Pakhi) said...

भारत बंद...पर अंडमान में बंदी का कोई असर नहीं.

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"पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

arvind said...

bahut acchi kavita.aaj ki sthiti par seedha chot karati hue.

संजय भास्कर said...

सही लिखा है...

संजय भास्कर said...

बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पार आना हुआ

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