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Saturday, February 13, 2010

वलेंतिने डे.

ये दास्ताँ है एक लड़की और लड़के की जो आजसे चार साल पहले आज ही के दिन मिले और आज वो बिछड़ गए...

दो लोग मिले जो एक दूजे से बिलकुल अलग थे
सोच अलग,दिशा अलग,जीवन के प्रति विचार अलग थे
पर कुछ तो था उन दोनों में ऐसा जो वो करीब आने लगे
और सब कुछ भूल कर साथ वक़्त बिताने लगे
फिर प्यार हुआ ऐसा की सब हदे भुला दी
एक दुसरे में खोकर दुनिया भुला दी
नागवार गुजरा ये प्यार ज़माने को तो जुदा कर दिया उनको
सब सपने,अरमान जो आँखों में थे ख़ाक में मिला दिया उनको
पर जुदा होकर भी मोहब्बत जिंदा थी उनका दिल में
अब ज़माने से छुप-छुप कर लगे वो मिलने
कोई कसर ना छोड़ी दुनिया ने अलग करने की उनहे
पर प्यार हिम्मत देता था सामना करने की उन्हें
दुनिया से तो लड़ लिए पर खुदा ही साथ छोड़ दे तो क्या करे
जिसकी इबादत में झुकते थे सर वो ही दुश्मन बन जाये तो क्या करे
आखिर टूट गया सपनो का शीशमहल और राहें हो गयी जुदा
उनको तड़पता देख अब तो खुश होगा खुदा
मोहब्बत का ऐसा सिला मिला उन्हें की जीनामुश्किल हो गया
चन्द सालो की यादें जेहेन में इस कदर रम गयी की बाहर निकलना मुश्किल हो गया

असमंजस में हैं अब वो की ख़ुशी मनाये की इस दिन उन्हें ज़िन्दगी का सब से ज्यादा प्यार करने वाला इंसान मिला या फिर दुःख की आज ही क दिन वो प्यार बिछड़ गया



Monday, February 8, 2010

हैप्पी वेलेंटैने डे -- एक अजब प्रेम कहानी !!

वो दो दिल थे , जो शायद ऊपर वाले की मर्ज़ी से मिले थे
दोनों का मिलना एक दिन अचानक से नेट पे हो गयादोनों मे खूब बाते होने लगी , रोज वो मिलने लगे नेट पे
अपनी भावनाओ को एक दुसरे के दिल तक भेजते रहे शब्दों के माध्यम से
और एक दिन लड़के ने लड़की से कहा की तुम उसको अच्छी लगती हो , लड़की कुछ समझ नहीं पाई आज कल खून के रिश्ते साथ नहीं निभाते तो कोई अजनबी जिसे आज तक देखा भी नहीं हे वो क्या साथ निभाएगा ?

उसने कहा उस लड़के से की तुमने मुझे देखा नहीं है एक बार मुझे देखो फिर उसने अपनी फोटो मेल की ,
उस लड़की का चेहरा ख़राब था कुछ साल पहले एक एक्सिडेंट मे उसका चेहरा बिगड़ गया था ऊपर वाला अच्छे लोगो के साथ ही बुरा क्यों करता है आज तक समझ नहीं आया ?
उस लड़के को लगा की ये मजाक होगा कोई लड़की जिस का दिल इतना साफ़ हो वो इतना बुरा दिख ही नहीं सकती, उसे विश्वास नहीं हुआ उसपे ...
पर मिलना मुमकिन नहीं था दोनों के बीच मे बहुत दूरिय थी दोनों अलग अलग प्रान्त मे रहते थे
लेकिन पढाई के सिलसिले मे उसको एक दिन उस लड़के के प्रान्त मे आना पड़ा शायद ऊपर वाला उनदोनों को मिलाना चाहता थाएक बार !!
फिर एक दिन दोनों मिले लेकिन जो उस लड़की ने उसके बारे मे बताया था वो एक दम सच था
उस लड़के ने उसे जब उसे दूर से देखा उसे झटका लगा एक ख्याल आया मन में की मिले उससे अब, लेकिन फिर पता नहीं क्यों वो उससे मिला दोनों ने कुछ पल साथ बिताये एक दुसरे के बारे मे जाना !!
उस दिन से उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गयी वो काफी समय अब फ़ोन पे बात करते
वो लड़का अब मन ही मन उसे चाहने लगा था
लेकिन वो जानता था की कुछ मुमकिन नहीं है क्युकी जात पात सम्प्रदाय प्रांतवाद और जाने कितने मुद्दे इस रिश्ते के बीच मे बाधा बनेंगे और उसके घर वाले और उसकी सोसाइटी वाले कभी भी ऐसी लड़की को अपने घर की बहु बनाना पसंद नहीं करेंगे !
और ही उस लड़की के घर वाले कभी किसी अजनबी पे इतना भरोसा करेंगे दोनों ही इस बात को अच्छे से जानते थे लेकिन दिल कहा किसी की सुनता है ?
वेलेंटैने डे की रात उस लड़के ने उसे फ़ोन किया और उसको अपने दिल की बात बताई
उसने कहा मे जानता हूँ में तुम्हरे लायक नहीं हूँ , मे तुम्हे ज़माने की सभी खुशियाँ नहीं दे सकता , हमारा इस जन्म मे मिलना मुमकिन नहीं हैलेकिन फिर भी में तुम को आज कह रहा हूँ आई लव यू
इस जनम में तुम अपने मम्मी पापा का अपना सपना पूरा करो , कुछ बन के दिखाओ लोगो को
लेकिन अगले जनम में और उसके बाद सात जन्मो के लिए तुम मेरी हो
में तुम्हारा इंतज़ार करूँगा हर जनम मैं
दोनों की दिल की धड़कने बढ़ गयी थीऔर दोनों के आँखों से आँसू बह रहे थे अब कोई कुछ नहीं कह रहा था सब शांत थे बस आँखों से आँसू बह रहे थेगम के या ख़ुशी के कोई नहीं जानता था !! पर एक अजब सा सुकून था दोनों के मन में !!

Saturday, January 30, 2010

अपने पराये

हमने दूर से, करीब के रिश्तों को.. टूटते देखा है ,
अपनों को ...गैरो के लिए ...छुटते देखा है

अब तो अपनों की खुशियों से भी दूर रखा है खुद को
क्युकी अपनों से ही ...अपनों को... लुटते देखा है

तिजोरी में रखे चंद कागज़ के टुकडो के कारण,
हमने अपनों को ...बेवजह रुठते देखा है
अपने हो जाते है पराये चंद लकीरों से
हमने बचपन के सपनो को खुली आँखों से टूटते देखा है

दर्द है इतना दिल में, किसे दिखाए ये जख्म ?
अपनों को हमने आँखे मूंदते देखा है !!

तुम दूर रहे , और दिल से भी दूर हो गए
तुम्हारे इंतज़ार में अखियों को बार बार रूसते देखा है !
हमने दूर से करीब के रिश्तों को टूटते देखा है

Tuesday, January 26, 2010

एक कोशिश...

एक कोशिश की थी अपने प्यार को भूल जाने की,
उसके साए से निकल अपनी पहचान बनाने की,
लाख बहाने बना दिल को समझाया भी था,
और यादों को एक एक कर मिटाया भी था,
नयी शुरुआत की थी एक उम्मीद के साथ,
की मंजिल मिलेगी अब रास्ते के साथ
दो कदम अभी बढे ही थे की ऐसी ठोकर लग गयी,
जहाँ से चलना शुरू किया मैं फिर वहीँ पे आ गयी,
एक खबर जो सुनी उनकी तो दिल फिर धड़कने लगा,
याद करते हैं वो हमें हर पल,ये सुन तड़पने लगा
दोराहे पर आकर खड़ी हो गयी है जन्दगी अब,
एक ओर जाना मुश्किल तो दूसरा बेहिसाब सा है अब....

Sunday, January 10, 2010

क्यों..

एक सवाल पूछा किसी ने और हमारी हस्ती हिला दी,
ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई हमें याद दिला दी,
क्या जवाब दे और क्या कहें उनसे
जो पूछा है उन्होंने की क्यों प्यार करे हम तुमसे।
आंखे झुका कर चले आये वहां से
और लगे सोचने कि सोचना शुरू करें कहाँ से।
एक जवाब तलाशते हुए न जाने कब आँख लग गयी,
उधेड़बुन में रास्ता बनाते सब कड़ियाँ उलझ गयी।
नींद में भी कहाँ चैन था
वोही 'क्यों' हर पल झूलता रहा
और मैं अपने जीवन के सब पन्ने टटोलता रहा।
जब आँख खुली तो एक नयी सुबह हो गयी थी
पर मेरी ज़िन्दगी एक क्यों पर अटक गयी थी...

Saturday, January 2, 2010

नेट फ्रेंड्स

थोड़े तुम्हारे गम और थोड़े हमारे गम
यहाँ मिल के कुछ कर लिए है कम
कुछ खुशियों के पल बिता लिएकुछ अंखियों मे सपने सजा लिए
बिना चले ही आने वाले जीवन की कितनी बार राहें तय कर ली है !

तुम उस किनारे हम इस किनारे मिलें कैसे ? दूरियां है दरमियाँ !!
पर हमने अपनी सोच को एक ही दिशा मे ला के
शब्दों के माध्यम से चलते हुए कई बार ही अपनी मंजिल को पा लिया है !!
कोन कहता है की हमे मिलना जरूरी है इस रिश्ते को निभाने के लिए ?

ये आभास और अहसास के रिश्ते है !!
ये दुनिया वालो की समझ मे आसानी से नहीं आने वाले !
क्योंकी ये मतलबी लोग तो बिना मतलब के अपनों को भी नहीं पूछते है !!

और हम यहाँ बिना कुछ पाने की चाह रखे,
तुम्हारे कुछ गम में डूबें शब्दों को अपनी आँखों से बहा रहे है !!

कोन कहता है की शब्द बदलने से जिन्दगी नहीं बदलती ?
हमने तो शब्दों के माध्यम से ही ........
जीवन का आदान प्रदान कर लिया है

Thursday, December 31, 2009

मन...

मन एक पंछी के जैसे हर पल उड़ना चाहे,
उम्मीदों के पंख लगा कर गगन को छूना चाहे,
कल क्या होगा कोई न जाने,
ये मतवाला तो बस आज को जीना चाहे

ये मन भी बांवरा है कैसे-कैसे ख्वाब दिखाए,
हकीक़त में जो दूर है,उसके करीब ले जाये,
काश इसकी सब आशा पूरी हो
जो ये चाहे बस इसे वो ही मिल जाये

पर
सच्चाई इस कुदरत की कुछ और ही दिखती है,
मन की उदारी भी इक दिन आ कर रूकती है
टूटते हैं जब अरमान दिल के तो
सब खुशियाँ हाथ से रेट की तरह फिसलती हैं

वक़्त के साथ फिर हर जख्म भरता जाता है
सपना कोई नया तब किसी कोने में बुनता जाता है
बार-२ ठोकर खा कर भी ये दिल
वो ही गलती करने को तैयार होता जाता है
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