Followers

Sunday, January 10, 2010

क्यों..

एक सवाल पूछा किसी ने और हमारी हस्ती हिला दी,
ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई हमें याद दिला दी,
क्या जवाब दे और क्या कहें उनसे
जो पूछा है उन्होंने की क्यों प्यार करे हम तुमसे।
आंखे झुका कर चले आये वहां से
और लगे सोचने कि सोचना शुरू करें कहाँ से।
एक जवाब तलाशते हुए न जाने कब आँख लग गयी,
उधेड़बुन में रास्ता बनाते सब कड़ियाँ उलझ गयी।
नींद में भी कहाँ चैन था
वोही 'क्यों' हर पल झूलता रहा
और मैं अपने जीवन के सब पन्ने टटोलता रहा।
जब आँख खुली तो एक नयी सुबह हो गयी थी
पर मेरी ज़िन्दगी एक क्यों पर अटक गयी थी...

13 comments:

विजय पाटनी said...

gr8 rachna gud going keep it up

Jogi said...

is 'kyon' ka jawab mile to wo bhi post karna :) but i think nahi milega ...good one ...All the best n keep it up !!!

शमीम said...

एक सुन्दर कविता.शुभकामनाए .

deependra sharma said...

nice one....

please also visit...

http://deependralove.blogspot.com/

MUFLIS said...

kaee baar
ye
"kayooN"
isi tarah hi
sataaya karta hai .

achhee , prabhaavshali rachnaa .

निर्मला कपिला said...

मन की कशमकश कब दिल से दूर जाती है। ये क्यों ही तो आदमी का चैन छीनती है बहुत अच्छी रचना शुभकामनायें

बूझो तो जानें said...

बहुत अच्छी रचना .

अलीम आज़मी said...

bahut gazab ka likhti hai aap ...

pramod kush ' tanha' said...

sunder bhaav hein...

श्रद्धा जैन said...

bahut achchi tarah se is kyon ko likha hai
sawal zindgi bhar bahut pareshaan karte hain

शुभम जैन said...

bahut sundar rachna Ekta ji...
bahut achcha likhti hia aap..

संजय भास्कर said...

achhee , prabhaavshali rachnaa .

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Related Posts with Thumbnails