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Tuesday, December 20, 2011

वक्त आ गया है ... हैप्पी विंटर


वक्त आ गया है ...
उस महरूनी स्वेटर, को फिर से बनाने का
मुन्ना को सर्दी से बचाने का ||
वो दो - बटा चार के फंदे, सलाइयों में डालने का
पुरानी पड़ी ऊन, को सँभालने का ||

वक्त आ गया है ...
वो उसका ऊन के गोले को , मुझ से दूर ले जाना
उसको समेटते, समेटते , उसका मुझमे समा जाना ||
ऊन में पड़ चुकी , उलझनों को सुलझाने का
मासूमियत से रिश्ते निभाने का ,
फिर वक्त आ गया है ...;) वक्त आ गया है ...;) ||

रिश्तों में गर्माहट लाने का , मीठी धुप को कतरें कतरें तक पहुँचाने का
तिल , रेवड़ी , गजक , गर्म गाजर का हलवा खाने का
वक्त आ गया है ...;) ||

अब आप भी ग़मों को खोल कर , छत पर सुखा दो
अपनी खुशियों को थोड़ी हवा लगा दो
वक्त आ गया है सीलन को मिटाने का , दुखों को अलाव में जलाने का
जीवन से कड़वाहट मिटने का , अपनों को करीब लाने का
वक्त आ गया है ...;) ||वक्त आ गया है ...;) ||

happy winters ||

4 comments:

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत और कोमल भावो की अभिवयक्ति......

सोनरूपा विशाल said...

happy winters !

संजय भास्कर said...

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

नीरज गोस्वामी said...

Waah...Gazab...

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