
वो अपनी उम्र से कुछ ज्यादा, बड़ी सी लगती है
उसके जीवन में खुशियों की, कमी सी लगती है |
मुस्कराती है ज़माने को, दिखाने के खातिर
अन्दर उसके , आसुओं की झड़ी सी लगती है
उसके जीवन में खुशियों की, कमी सी लगती है |
मुस्कराती है ज़माने को, दिखाने के खातिर
अन्दर उसके , आसुओं की झड़ी सी लगती है
वो अपनी उम्र से कुछ ज्यादा, बड़ी सी लगती है ||
उसका बचपना छूट गया, जवानी की दहलीज पे
ज्यादा दिन टिक ना सका, यौवन का खुमार..|
कभी खुद लापरवाह , कभी रिश्ते बेपरवाह
जिन्दगी अब उसकी, मज़बूरी सी लगती है ..|
वो अपनी उम्र से कुछ ज्यादा, बड़ी सी लगती है ||
किसी की नफरत ने , उसे बड़ा बना दिया |
किसी की फितरत ने, उसे बड़ा बना दिया |
आसुओं को पीती रही , गमों को सीती रही
अपने दर्द को उसने , हमेशा हँसी में उड़ा दिया |
उसका बचपना छूट गया, जवानी की दहलीज पे
ज्यादा दिन टिक ना सका, यौवन का खुमार..|
कभी खुद लापरवाह , कभी रिश्ते बेपरवाह
जिन्दगी अब उसकी, मज़बूरी सी लगती है ..|
वो अपनी उम्र से कुछ ज्यादा, बड़ी सी लगती है ||
किसी की नफरत ने , उसे बड़ा बना दिया |
किसी की फितरत ने, उसे बड़ा बना दिया |
आसुओं को पीती रही , गमों को सीती रही
अपने दर्द को उसने , हमेशा हँसी में उड़ा दिया |
वक्त बेवक्त भीगी पलकें ,अश्कों को उसकी, मंजूरी सी लगती है
वो अपनी उम्र से कुछ ज्यादा , बड़ी सी लगती है ||