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Wednesday, July 20, 2011

बारिश के बाद कि सुबह..


बारिश के बाद कि सुबह ,थोड़ी भीगी सी , थोड़ी अलसाई सी
हरें पेड़ों कि पत्तियां थोड़ी खिली सी, थोड़ी मुरझाई सी ...
थोड़ी नमी सी दीवारों में , थोड़ी बूँदें किनारों में
थोड़ी सी मस्ती इशारों में, उड़ते परिंदे नजारों में
सूरज कि बाहें खुली खुली , हर एक कली इठलाई सी
बारिश के बाद कि सुबह ,थोड़ी भीगी सी , थोड़ी अलसाई सी ||

जारी है , बादलों का सूरज के साथ,अठखेलियाँ करना
गीले आँगन में हमारा , संभल संभल के चलना ...
टूटी छतों कि मरम्मत का दौर , कहीं से बहते पानी का शोर ||
अभी तक वो छोटी गिलहरी , पानी से कुछ सकुचाई सी
बारिश के बाद कि सुबह ,थोड़ी भीगी सी , थोड़ी अलसाई सी ||

बारिश के बाद कि सुबह , ना जाने क्यूँ आसमान , कुछ ज्यादा ही नीला सा है
पत्तों, पेड़ों , दीवारों , धरती के साथ, मन भी तो थोडा गीला सा है ||
सीली- सीली हवा के झोंके, ख्वाबों में भी कुछ सीलन सी ले आयें है..
गीली हरी दूब के अहसास को , हम अपना दिल दे आयें है...
देखो फिर एक बार , प्रक्रति ने हमसे, दोस्ती निभाई सी ...
बारिश के बाद कि सुबह ,थोड़ी भीगी सी , थोड़ी अलसाई सी ||

3 comments:

राकेश कौशिक said...

"देखो फिर एक बार, प्रक्रति ने हमसे, दोस्ती निभाई सी ...
बारिश के बाद कि सुबह, थोड़ी भीगी सी, थोड़ी अलसाई सी"

सार्थक प्रयास

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन।
--------
कल 03/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vidhya said...

बेहतरीन।
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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