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Sunday, January 13, 2013

खबर...









जब उसका जन्म हुआ
सब उसके आस पास थे ....
घेरे थे सब उसको चारों और से
सब उसके अंदर तक झांक लेना चाहते थे
उसके जर्रे जर्रे को.. पहचान लेना चाहते थे
किसी ने देख कर आह किया , किसी ने वाह किया
किसी ने एक दो और जोड़ कर उसे अफवाह किया ||

वो सुर्ख़ियों में रही कुछ दिन ...

दुनियां के आसुओं से उसकी जिन्दगी नम हुई ...
फिर कुछ दिन बीते , भीड़ उसके आस पास कम हुई  ...
जख्म भरने कोई आगे नहीं आया, वो अपने में ही गुम हुई ..

सिर्फ पुराने पन्नों में ,उसकी जिन्दगी छुपी है ...
वो एक "खबर" थी जो अब दम तोड़ चुकी है :)

4 comments:

sushma 'आहुति' said...

सिर्फ पुराने पन्नों में ,उसकी जिन्दगी छुपी है ...
वो एक "खबर" थी जो अब दम तोड़ चुकी है :)ek kadwa sach....

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

Vibha Rani Shrivastava said...

मंगलवार 29/01/2013को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं .... !!
आपके सुझावों का स्वागत है .... !!
धन्यवाद .... !!

Rahul said...

True...

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